अभ्यास के माध्यम से जागरण: नियमित योग साधना की कला

योग की यात्रा केवल शरीर के लचीलेपन, शारीरिक शक्ति या ध्यान में बिताए गए समय से नहीं मापी जाती। इसका प्रतिबिंब हमारे ध्यान की स्थिरता, हमारी प्रतिक्रियाओं की गुणवत्ता और जीवन के प्रति हमारी ईमानदार दृष्टि में भी दिखाई देता है। योग केवल कुछ क्षणों के लिए प्रतिदिन किया जाने वाला अभ्यास नहीं है। यह पूरे जीवन में अधिक जागरूकता लाने का एक निमंत्रण है।

भगवद्गीता 2.69 — वास्तव में जागृत होने का ज्ञान

भगवद्गीता 2.69 हमें एक महत्वपूर्ण प्रश्न के सामने खड़ा करती है: हम अपने जीवन को किस दृष्टि से देख रहे हैं?

क्या हम केवल बाहरी सफलता, प्रशंसा और इच्छाओं के पीछे भाग रहे हैं? या हम अपने विचारों, प्रतिक्रियाओं और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने का भी प्रयास कर रहे हैं?

A song I sing to Thee

A song I sing. A song I sing to Thee!Nor care I for men’s comments, good or bad.Censure or praise I hold of no account.Servant am I, true servant of Thee Both (Purusha and Prakriti together.),Low at Thy feet, with Shakti, I salute! Thou standest steadfast, ever at my back,Hence when I turn me round,Continue reading “A song I sing to Thee”

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